Saturday, June 25, 2022

bhoot ki kahani

 bhoot ki kahani

भूत की कहानी

शाम ढल चुकी थी।  दोनों  ने योजना बनायीं की छत पैर जाया जाए। 

सीढिया चढ़ कर वो छत से नीचे झाँक ही रहे थे की पीछे से कुछ खाट पाट की आवाज आय। 

पीछे मुड़ कर देखा तो मुँह से चीख निकल गयी।  एक औरत घूंघट काढ़े सबसे ऊपर की दीवार पैर बैठी थी।

औरत एक ही छलांग में उनके सामने पहुंची और झट से दोनों का मुँह बंद कर दिय।  सांस तो पहले ही रुकी थी।

औरत ने कहा " डरो मत।  मेरा नाम शकुंतला है।  और मुझे तुम्हारी मदद की जरुरत है।  "

दोनों बच्चो को तो जैसे काटो तो खून नहीं   जैसे ही घूंघट हवा से उड़ा तो दिखा की उसकी आँखों की जगह सिर्फ दो काले अंतारे थे।

वो भी अन्दर धंसे हु।  उसके हाथो पैर चमड़ी भी नहीं थी।

उसने कहा मेरे माँ बाप को साथ वाले घर में तुम दोनों की जरूरत ह।

उसने दोनों बचो का हाथ पकड़ा और घसीटते हुए उनको ले गय।  फिर दोनों बच्चे आपसे सहमति से ही चलने लगे क्योकि अब बचने का कोई रास्ता नहीं थ।

एक घर से दुसरे घर पैर पहुंचते हुए वो दोनों बच्चे और शकुंतला एक ऐसे घर की छत से सीढिया उतरने लगे जहा सिर्फ घुप्प अँधेरा थ।।

 

 

 

शकुंतला पीछे मुँह करके उलटी दिशा में सीढिया उतर रही थी क्योकि उसके पैर उलटे थे

नीचे पहुंच कर दोनों बच्चो ने देखा सिर्फ एक कमरे में जीरो वाट का बल्ब ओन है।  वह एक वृद्ध व्यक्ति पिलंग पर लेटा हुआ है।  और वृद्ध महिला सिरहाने पर बैठी है।  वृद्ध महिला ने कहा " बच्चो तुमको हमारा एक ख़ास काम करने के लिए यहाँ बुलाया गया है "

बच्चे और भी डर गए।  कैसे लोग हैं।  वृद्ध महिला के सारे दांत कीलों के बने थे।  और आँखे कान की तरफ लगी थी।

" तुमको हमारे लिए ये दवाइया लानी पड़ेगी वरना"

शेष कुछ कहने की आवश्यकता नहीं थी। 

बच्चो ने ओके ओके किया और दवाई के लिए कागज़ लेकर फटाफट छत के रस्ते से अपने घर आये और शीघ्र ही घर से बाहर जाकर अपने नाना की दूकान से दवाईया चुरा ली।  और तत्क्षण ही वापस उसी घर के रस्ते से वृद्ध लोगो को दवाईया थमा दी।

वृद्ध महिला ने कहा " शाबाश बच्चो।  जा शकुंतला इनको वापस छोड़ "

बच्चो ने एक ही साथ सिर्फ ही वाक्य में उत्तर दिया "नहीं , नहीं हम चले जायेंगे "

और फिर जो दौड़ लगायी और चुप चाप बिना कुछ कहे सो गए।  घर में सब हैरान थे की बच्चे इतने सयाने कैसे हो गए।

सुबह दोनों की तबियत ठीक नहीं थ।  पूछने पर दोनों ने पूरी घटना बताई। 

घर वाले को पसीने छूट गए।  कारण था की वो बताया गया पुराना घर १९६५ से बंद था। 

आस पड़ोसियो ने मिल कर वो घर का ताला तुड़वाया।  जब अंदर गए तो पूरे घर में छिपकलियों और मकड़ियों का डेरा थ। 

सब जगह जाले ही जाले।  पूरा घर पुराने रुके पानी से महका हुआ थ।  अंदर सिर्फ एक कमरे की बत्ती जल रही थी।  बल्ब की रौशनी में भी कुछ भी स्पस्थ्त नहीं दिख रहा था। 

और दवाईया उसी बिस्तर पर रखी हुई थी।  कागज़ पर १९६५ का प्रिस्क्रिप्शन था